गया (बिहार):

राष्ट्रीय मानवाधिकार न्याय आयोग की गया जिला टीम ने एक जटिल और संवेदनशील पारिवारिक विवाद का समाधान अत्यंत मानवीय, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से कर एक सराहनीय उदाहरण पेश किया है। इस कार्य की न केवल संबंधित पक्षों ने सराहना की है, बल्कि इसे मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मामला एक ऐसे दंपती से जुड़ा था, जहाँ महिला अपने पति के साथ आगे जीवन व्यतीत नहीं करना चाहती थी। दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तलाक (तलाकनामा) की प्रक्रिया अपनाई गई। यद्यपि यह मामला कानूनी रूप से सीधा प्रतीत होता था, लेकिन इससे जुड़ी मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक दबाव और भावनात्मक तनाव इसे अत्यंत जटिल बना रहे थे।

ऐसे में गया जिला टीम ने अत्यधिक संवेदनशीलता, निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए दोनों पक्षों की भावनाओं को समझा। टीम ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करते हुए तलाक की कानूनी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया और हर चरण पर मार्गदर्शन प्रदान किया।

पूरी प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों को मानसिक और भावनात्मक सहयोग दिया गया, जिससे वे बिना किसी दबाव या तनाव के अपने निर्णय को स्वीकार कर सके। इस पहल से न केवल दो व्यक्तियों को सम्मानपूर्वक नया जीवन शुरू करने का अधिकार मिला, बल्कि एक संभावित लंबे कानूनी विवाद को भी शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त किया गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार न्याय आयोग ने गया जिला टीम के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि मानवाधिकार केवल बड़े मामलों तक सीमित नहीं होते, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और मानसिक शांति की रक्षा भी मानवाधिकार का अहम हिस्सा है।

आयोग ने गया जिला टीम के सभी सदस्यों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई और धन्यवाद दिया है तथा इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया है।

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