Patna:  बिहार की राजनीति में सामाजिक संतुलन, आपसी सम्मान और भाईचारे की परंपरा हमेशा से मजबूत रही है। इसी विषय पर अपनी बात रखते हुए डॉ. एस. मधुप ने कहा कि बिहार का सामाजिक ताना-बाना तभी मजबूत रह सकता है जब अलग-अलग समाज के लोग एक-दूसरे के सम्मान और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि राजनीति का असली उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि उसे बांटना।

डॉ. एस. मधुप के अनुसार आज बिहार में जिस तरह नेतृत्व को लेकर चर्चा हो रही है, उसे केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी देखना चाहिए। उनका मानना है कि अगर किसी नेता को आगे बढ़ाया जाता है तो उसके पीछे एक बड़ा संदेश यह भी होता है कि समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले और सभी समुदायों को सम्मान के साथ आगे आने का अवसर प्राप्त हो।

उन्होंने कहा कि कुर्मी और कुशवाहा समाज दोनों ही बिहार के मेहनती, जागरूक और राजनीतिक रूप से सक्रिय समाज माने जाते हैं। इन दोनों समाजों का योगदान बिहार के सामाजिक और आर्थिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण रहा है। खेती-किसानी से लेकर व्यापार, शिक्षा और राजनीति तक हर क्षेत्र में इन समाजों ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से पहचान बनाई है।

डॉ. मधुप ने यह भी कहा कि अगर कुर्मी और कुशवाहा समाज के बीच आपसी समझ और सहयोग मजबूत होता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे बिहार पर पड़ेगा। जब दो मजबूत और जागरूक समाज साथ आते हैं, तो राजनीति में स्थिरता आती है और विकास के लिए मजबूत माहौल तैयार होता है। इसलिए किसी भी राजनीतिक चर्चा को समाज में दूरी बढ़ाने के बजाय भाईचारे को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

उन्होंने युवाओं को भी संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को जातीय विवादों से ऊपर उठकर विकास, शिक्षा और सामाजिक एकता की बात करनी चाहिए। बिहार की ताकत उसकी विविधता और सामाजिक एकता में है। अगर सभी समाज मिलकर राज्य के विकास की दिशा में काम करेंगे, तो बिहार तेजी से आगे बढ़ सकता है।

डॉ. एस. मधुप का मानना है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन समाज के स्तर पर भाईचारा और सम्मान हमेशा बना रहना चाहिए। कुर्मी और कुशवाहा समाज का रिश्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी गहरा है। इस रिश्ते को और मजबूत बनाने की जरूरत है।

अंत में उन्होंने कहा कि बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी है कि सभी समाज एक-दूसरे का सम्मान करें और मिलकर आगे बढ़ें। जब समाज में एकता और भाईचारा मजबूत होता है, तभी राज्य सही मायने में विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता है। यही सोच बिहार को एक मजबूत, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील राज्य बनाने की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

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